20 साल पुराने ‘पावर सेंटर’ पर सियासी जंग: राबड़ी का दो टूक- फोर्स भेजिए, लेकिन बंगला खाली नहीं करूंगी


10 सर्कुलर रोड को लेकर NDA सरकार और लालू परिवार के बीच बढ़ा टकराव, पहले भी सरकारी आवासों को लेकर विवादों में रहा है RJD का प्रथम परिवार


राबड़ी देवी के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नया सियासी संघर्ष शुरू हो गया है। 

पटना
। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी आवास बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने साफ शब्दों में कह दिया है कि वह पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड आवास खाली नहीं करेंगी। सरकार यदि आवास वापस लेना चाहती है तो फोर्स भेजकर खाली करा सकती है।

 राबड़ी देवी के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नया सियासी संघर्ष शुरू हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि लालू परिवार का सरकारी आवासों को लेकर विवादों से पुराना नाता रहा है। मुख्यमंत्री आवास से लेकर उपमुख्यमंत्री आवास तक, सत्ता बदलने के बाद कई बार आवास खाली करने को लेकर विवाद खड़े हुए हैं। अब एक बार फिर 20 वर्षों से राजद की राजनीति के केंद्र रहे 10 सर्कुलर रोड को लेकर सियासत गर्म हो गई है।

20 साल पुराने ठिकाने को छोड़ने को तैयार नहीं राबड़ी

2025 में NDA सरकार बनने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव किए गए। इन्हीं में एक फैसला विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित सरकारी आवास को बदलने का भी था। पहले यह पदधारी 10 सर्कुलर रोड आवास में रहते थे, लेकिन सरकार ने इसे बदलकर 39 हार्डिंग रोड कर दिया।

सरकार के इस निर्णय को करीब पांच महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन राबड़ी देवी अब भी 10 सर्कुलर रोड में ही रह रही हैं। हाल ही में जब इस मुद्दे पर उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वे बंगला खाली नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को आवास चाहिए तो फोर्स भेजकर खाली करा ले।
राबड़ी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सत्ता पक्ष इसे सरकारी नियमों की अवहेलना बता रहा है, जबकि राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई के तौर पर पेश कर रहा है।

राजद की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र रहा है 10 सर्कुलर रोड
10 सर्कुलर रोड केवल एक सरकारी आवास नहीं, बल्कि पिछले दो दशकों से राजद की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद से ही यह आवास लालू परिवार का स्थायी राजनीतिक ठिकाना बना हुआ है।
राजद के बड़े फैसले, चुनावी रणनीतियां, नेताओं की बैठकों से लेकर गठबंधन की चर्चाएं तक इसी परिसर से संचालित होती रही हैं। यही वजह है कि इस आवास को राजद का "पावर सेंटर" भी कहा जाता है।

अब भवन निर्माण विभाग की ओर से यह आवास मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है।
जब CM हाउस खाली करने को लेकर हुआ था बड़ा विवाद
लालू परिवार और सरकारी आवास का विवाद कोई नया नहीं है। वर्ष 2005 में सत्ता परिवर्तन के बाद भी ऐसा ही विवाद सामने आया था। तब राजद सरकार की विदाई हुई और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने।

बताया जाता है कि सत्ता बदलने के बाद भी लालू-राबड़ी परिवार तत्काल मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग खाली करने को तैयार नहीं था। नोटिस दिए जाने के बाद भी परिवार की ओर से कहा गया था कि उन्हें उपयुक्त वैकल्पिक आवास नहीं मिला है, इसलिए वे अभी आवास नहीं छोड़ेंगे।

उस दौरान मुख्यमंत्री बनने के बावजूद नीतीश कुमार को लंबे समय तक मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश नहीं मिल पाया था। वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, उस समय वे सर्किट हाउस से सरकारी कामकाज करते थे और निजी आवास में रह रहे थे। करीब ढाई महीने बाद लालू परिवार के 10 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होने के बाद मुख्यमंत्री आवास खाली हुआ था। इसके बाद भी मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण में समय लगा और नीतीश कुमार कई महीनों बाद वहां रहने पहुंचे।

तेजस्वी भी बंगले के लिए पहुंचे थे हाईकोर्ट

सरकारी आवास को लेकर सबसे चर्चित विवाद 2017 में सामने आया था। महागठबंधन सरकार टूटने के बाद तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री पद से हट गए थे। उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें मुख्यमंत्री आवास के बगल में स्थित 5 देशरत्न मार्ग का बंगला आवंटित किया गया था।

सरकार बदलने के बाद NDA ने उन्हें यह आवास खाली करने का निर्देश दिया और नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित दूसरे आवास में शिफ्ट होने को कहा। लेकिन तेजस्वी यादव ने बंगला खाली करने से इनकार कर दिया।

मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से उन्हें राहत नहीं मिली। अदालत के आदेश के बाद तेजस्वी यादव को बंगला खाली करना पड़ा। इस पूरे विवाद के दौरान सरकारी आवासों के दुरुपयोग और पूर्व पदाधिकारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी गंभीर सवाल उठे थे।

अब सरकार के सामने अगला कदम क्या?

राबड़ी देवी के ताजा बयान के बाद अब नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। एक तरफ विभागीय आदेश के अनुसार आवास का आवंटन दूसरे मंत्री को किया जा चुका है, वहीं दूसरी तरफ राबड़ी देवी ने साफ कर दिया है कि वह स्वेच्छा से बंगला छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं।

ऐसे में यह विवाद केवल एक सरकारी आवास तक सीमित नहीं रह गया है। यह सत्ता और विपक्ष के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और राबड़ी देवी अपने रुख पर कितनी मजबूती से कायम रहती हैं, इस पर बिहार की राजनीति की नजरें टिकी रहेंगी।

बंगले पर पहुंची प्रशासनिक टीम, राबड़ी देवी से की बातचीत 

पटना पुलिस और प्रशासन की टीम शनिवार दोपहर 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर पहुंची। सचिवालय एसडीपीओ अनु कुमारी आवास के भीतर गईं और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से मुलाकात कर बातचीत की। इस दौरान भवन निर्माण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।

                                बंगले पर पहुंची पुलिस

जानकारी के अनुसार, प्रशासन की ओर से राबड़ी देवी से सरकारी आवास खाली करने का अनुरोध किया गया तथा उन्हें संबंधित नियमों और प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही, उन्हें हार्डिंग रोड स्थित आवंटित नए आवास में स्थानांतरित होने के लिए कहा गया। 


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