SDO अनिल कुमार पर सरकार का सबसे बड़ा एक्शन! 25.92 लाख रुपये का हिसाब नहीं, हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी, 'निंदा' की सजा के बाद अब पद से हटाने की अनुशंसा
वित्तीय गड़बड़ी, प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालय के आदेश की अवहेलना के गंभीर आरोपों में घिरे बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अनिल कुमार पर सरकार सख्त हो गई है। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद उन्हें वर्तमान एसडीओ पद से हटाने की अनुशंसा कर दी गई है।
पटना। बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अनिल कुमार पर सरकार ने बड़ी और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक लापरवाही और पटना हाईकोर्ट के आदेश की कथित अवहेलना जैसे गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें वर्तमान पद से हटाने की अनुशंसा करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को विस्तृत प्रतिवेदन भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और इसे सरकार की "जीरो टॉलरेंस" नीति के तहत उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।
25.92 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला, जांच में खुली बड़ी वित्तीय गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जब अनिल कुमार सीवान जिले के महाराजगंज अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) थे, उस दौरान अनुमंडल कार्यालय के वित्तीय अभिलेखों की जांच कराई गई। जांच में बैंक खाते और रोकड़ बही (कैश बुक) का मिलान करने पर 25 लाख 92 हजार 417 रुपये का स्पष्ट हिसाब नहीं मिला। जांच अधिकारियों ने इसे सामान्य त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता और पर्यवेक्षीय विफलता माना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय अभिलेखों के रखरखाव और निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे सरकारी धन के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इस मामले को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
छह अधिकारियों का बिना नोटिस वेतन रोका, जांच में गलत पाई गई कार्रवाई
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अनिल कुमार ने बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए छह प्रखंड स्तरीय अधिकारियों का वेतन रोक दिया था। नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि इस फैसले से संबंधित अधिकारियों को अनावश्यक मानसिक, आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत माना गया और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया गया।
PDS डीलर पर FIR के बाद भी 10 दिन तक नहीं हुआ लाइसेंस निलंबित
एक अन्य मामले में यह पाया गया कि जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के एक विक्रेता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद उसके लाइसेंस को तत्काल निलंबित नहीं किया गया। करीब 10 दिनों तक कार्रवाई लंबित रही, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई। जांच समिति ने इसे भी गंभीर प्रशासनिक चूक माना।
स्पष्टीकरण नहीं आया काम, मिली 'निंदा' की सजा और रुकी वेतनवृद्धि
इन सभी मामलों में अनिल कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन अनुशासनिक प्राधिकार ने उनके जवाब को असंतोषजनक करार दिया। इसके बाद उन्हें 'निंदा' (Censure) की सजा दी गई। साथ ही उनकी एक वार्षिक वेतनवृद्धि को असंचयात्मक प्रभाव (Non-Cumulative Effect) से रोकने का आदेश भी जारी कर दिया गया।
हालांकि यह दंड सेवा समाप्ति जैसा नहीं है, लेकिन सरकारी सेवा में इसे गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जाता है और इसका प्रभाव अधिकारी की सेवा रिकॉर्ड तथा भविष्य की प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर पड़ता है।
बेगूसराय में हाईकोर्ट के आदेश की कथित अवहेलना का भी मामला
अनिल कुमार पर सिर्फ वित्तीय अनियमितता ही नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश की अनदेखी का भी गंभीर आरोप है। आरोप है कि बेगूसराय में एसडीओ रहते हुए उन्होंने पटना हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया।
जानकारी के अनुसार, रैयती भूमि विवाद से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2026 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद 18 जनवरी 2026 को दखल-कब्जे की कार्रवाई करा दी गई। इस कार्रवाई को हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना माना गया।
डीएम, एसपी समेत आठ अधिकारियों को भी झेलनी पड़ी अवमानना याचिका
हाईकोर्ट के आदेश की कथित अनदेखी के कारण बेगूसराय के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित आठ अधिकारियों को अवमानना याचिका का सामना करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा महाधिवक्ता स्तर पर हुई, जिसमें इसे बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के विपरीत माना गया।
समीक्षा में यह भी कहा गया कि न्यायालय के आदेशों का पालन कराना प्रत्येक प्रशासनिक अधिकारी की संवैधानिक और वैधानिक जिम्मेदारी है। यदि इसमें लापरवाही होती है तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जा सकते हैं।
सरकार को भेजी गई बड़ी अनुशंसा, अब अंतिम फैसले पर नजर
पूरे मामले की जांच और समीक्षा के बाद जिला प्रशासन ने सरकार को विस्तृत प्रतिवेदन भेजते हुए अनिल कुमार को तत्काल वर्तमान एसडीओ पद से मुक्त करने की अनुशंसा की है। अब अंतिम निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग के स्तर पर लिया जाएगा।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं है। विशेष रूप से वित्तीय अनियमितता, न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। बतादें की यह मामला अब बिहार के प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बन गया है और सभी की निगाहें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें