बसंतपुर फीडर की बदहाल व्यवस्था से उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा, हल्की आंधी-बारिश में दो-दो दिन गुल रहती है बिजली

 ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद विभाग कोई स्थायी समाधान नहीं कर रहा है। हल्की आंधी और बारिश होते ही बिजली आपूर्ति एक से दो दिनों तक ठप हो जाती है, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है





सीवान: महाराजगंज विद्युत पावर सब स्टेशन से बसंतपुर फीडर के अंतर्गत संचालित होने वाली बिजली व्यवस्था की बदहाली ने एक बार फिर विद्युत विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद विभाग की उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। स्थिति यह है कि हल्की आंधी या थोड़ी सी बारिश होते ही बिजली आपूर्ति एक से दो दिनों तक बाधित हो जाती है, जिससे आम लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।


गौरतलब है कि महाराजगंज विद्युत पावर सब स्टेशन से 11 हजार वोल्ट की आपूर्ति बसंतपुर फीडर के माध्यम से की जाती है। इस फीडर से दरौंदा प्रखंड के बालबंगरा, भीखाबांध, बेलदारी टोला, झाझवा, जलालपुर सहित कई गांवों तथा महाराजगंज प्रखंड के बिशुनपुर महुआरी समेत दर्जनों गांवों में बिजली आपूर्ति होती है। किसी भी स्थान पर मामूली तकनीकी खराबी आने पर दोनों प्रखंडों के हजारों उपभोक्ताओं की बिजली एक साथ बाधित हो जाती है।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बसंतपुर फीडर की लाइन लंबी होने के कारण पहले से ही बिजली आपूर्ति प्रभावित रहती है। ऊपर से जर्जर तार और घने पेड़ों के बीच से गुजर रही विद्युत लाइन आंधी-बारिश के दौरान बार-बार फॉल्ट का शिकार हो जाती है। ऐसे में घंटों नहीं, बल्कि कई बार एक-दो दिनों तक बिजली बहाल नहीं हो पाती।


ग्रामीणों ने बताया कि कई बार आवेदन देकर मांग की गई कि बिशुनपुर महुआरी एवं आसपास के गांवों को निकटवर्ती रिसौरा पावर सब स्टेशन अथवा पटेढा पावर सब स्टेशन से जोड़ दिया जाए, ताकि लंबी लाइन की समस्या समाप्त हो सके और निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की।


लोगों का आरोप है कि विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) और विद्युत एसडीओ इस गंभीर समस्या के समाधान को लेकर लगातार ढिलाई बरत रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं में विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।


ग्रामीणों ने अब इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय,मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा विद्युत विभाग के वरीय अधिकारियों से करते हुए बसंतपुर फीडर की समस्या का शीघ्र स्थायी समाधान कराने और प्रभावित गांवों को निकटवर्ती पावर सब स्टेशन से जोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन करने को बाध्य होंगे।


बिजली गुल होते ही अधिकारियों के मोबाइल हो जाते हैं बंद

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होते ही उपभोक्ता समस्या की जानकारी देने और समाधान जानने के लिए विभाग के सरकारी मोबाइल नंबरों पर लगातार संपर्क करने का प्रयास करते हैं। हालांकि, अधिकांश लोगों को निराशा ही हाथ लगती है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई बार महाराजगंज पावर सब-स्टेशन का नंबर पहले व्यस्त (बिजी) मिलता है और कुछ देर बाद स्विच ऑफ हो जाता है।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि महाराजगंज के बिजली एसडीओ अक्सर उपभोक्ताओं का फोन रिसीव नहीं करते। जबकि जूनियर इंजीनियर (जेई) से कभी-कभार संपर्क हो भी जाता है, लेकिन समस्या के समाधान को लेकर कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।





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