LPG-पेट्रोल के बाद अब चावल पर संकट! यूपी-बिहार में मंडराया अल-नीनो का खतरा, किसानों से लेकर रसोई तक बढ़ी टेंशन

 देश में पहले से महंगाई, गर्मी और ईंधन कीमतों की मार झेल रहे लोगों के सामने अब एक और बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल अल-नीनो का असर भारतीय मानसून को कमजोर कर सकता है, जिससे यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में धान और मक्का जैसी खरीफ फसलों का उत्पादन घट सकता है। अगर बारिश सामान्य से कम हुई तो इसका सीधा असर किसानों की कमाई और आम लोगों की थाली पर पड़ेगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार, यूपी, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में चावल का बड़ा संकट जो सकता है।


नई दिल्ली। देश में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है और अब वैज्ञानिकों ने एक नई चिंता जाहिर की है। अल-नीनो की सक्रियता बढ़ने के संकेतों के बीच आशंका जताई जा रही है कि इस बार मानसून कमजोर पड़ सकता है। इसका सबसे बड़ा असर उत्तर भारत के कृषि प्रधान राज्यों, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश पर पड़ने की संभावना है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े वैज्ञानिकों के अध्ययन में सामने आया है कि अल-नीनो वाले वर्षों में धान, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी खरीफ फसलों की पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक पहले भी कई जिलों में चावल उत्पादन 10 फीसदी से ज्यादा घट चुका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून कमजोर रहा तो धान की बुवाई प्रभावित होगी। बिहार, यूपी, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है, जहां बड़ी आबादी खेती और चावल उत्पादन पर निर्भर है।

इधर उत्तर भारत में भीषण गर्मी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री के करीब पहुंच रहा है। मौसम विभाग ने हीटवेव को लेकर अलर्ट जारी किया है। ऐसे में अगर समय पर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खेती के साथ-साथ जल संकट भी गहरा सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि बदलते जलवायु चक्र के कारण अल-नीनो जैसी घटनाएं अब ज्यादा बार देखने को मिल रही हैं। इसलिए पारंपरिक खेती के तरीकों में बदलाव जरूरी हो गया है। वैज्ञानिकों ने सरकार को सूखा सहने वाली फसल किस्मों, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और किसानों के लिए मौसम आधारित एडवाइजरी सेवाएं बढ़ाने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात नहीं संभले तो आने वाले महीनों में चावल और दूसरी जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर सीधे आम आदमी की रसोई पर पड़ेगा।

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