मंत्रिमंडल से मंगल पांडे OUT! श्री पांडे पर क्यों बदला बीजेपी का मूड?

बिहार की नई सत्ता संरचना में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—मंगल पांडे। कभी सरकार के सबसे ताकतवर मंत्रियों में गिने जाने वाले मंगल पांडे इस बार सम्राट चौधरी की नई कैबिनेट से बाहर हो गए। स्वास्थ्य और कृषि जैसे बड़े मंत्रालय संभाल चुके नेता का अचानक मंत्रिमंडल से बाहर होना सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि बीजेपी की नई रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है। सत्ता के गलियारों में अब सवाल यही है कि क्या मंगल पांडे की भूमिका सरकार से निकलकर संगठन में और बड़ी होने वाली है?

                   फोटो: पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे 

पटना: सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा सुर्खियों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता मंगल पांडे हैं, जिन्हें इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली। लंबे समय तक बिहार सरकार में अहम जिम्मेदारियां निभाने वाले मंगल पांडे का नाम मंत्रियों की सूची से गायब रहने पर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मंगल पांडे बिहार की राजनीति में बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी कई वर्षों तक संभाली। कोरोना काल के दौरान भी वे लगातार चर्चा में रहे। हालांकि उस दौर में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार पर कई सवाल उठाए थे, जिसका राजनीतिक असर भी देखने को मिला।

सूत्रों की मानें तो बीजेपी इस बार बिहार में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तैयार करने में जुटी है। पार्टी ने कैबिनेट विस्तार में युवा, पिछड़ा और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी है। इसी रणनीति के तहत कुछ पुराने चेहरों को संगठन की भूमिका में भेजने की तैयारी की जा रही है।

            फोटों: अमित साह से मुलाकात करते मंगल पांडे 

 चर्चा है कि मंगल पांडे को जल्द ही बीजेपी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। मंगल पांडे के अलावा सुरेंद्र मेहता और नारायण प्रसाद को भी नई कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। अब साफ माना जा रहा है कि एनडीए ने आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए पूरी टीम को नए अंदाज में तैयार किया है।

नई कैबिनेट में बीजेपी और जेडीयू दोनों ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश की है। कई नए चेहरों को मौका देकर यह संदेश देने की कोशिश हुई है कि गठबंधन अब युवा और नए नेतृत्व के साथ चुनावी मैदान में उतरना चाहता है।

रिपोर्ट: प्रियांशु कुमार सिंह 



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