फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, वैशाली में साइबर थाना की बड़ी कार्रवाई

आधार, पैन, वोटर आईडी से लेकर बैंक दस्तावेज तक किए जा रहे थे तैयार, साइबर थाना की छापेमारी में बड़ा खुलासा

        पुलिस ने गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है।

पटना: बिहार में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच Bihar Police को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वैशाली जिले में फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान लैपटॉप, स्कैनर, फिंगरप्रिंट डिवाइस, मोबाइल फोन और भारी मात्रा में नकली दस्तावेज बरामद किए हैं। मामले में डिजिटल स्टूडियो और CSC सेंटर के संचालक राजीव रंजन कुमार को गिरफ्तार किया गया है।


यह कार्रवाई साइबर थाना वैशाली की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर की। पुलिस के अनुसार, दिनांक 04 मई 2026 को CCSU पटना से सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ साइबर अपराधी अवैध वेबसाइटों के माध्यम से सरकारी दस्तावेजों की फर्जी कॉपी तैयार कर रहे हैं और उनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। सूचना में विशेष रूप से babartps.xyz और psprint.xyz/login.php जैसी वेबसाइटों का जिक्र किया गया था, जिनके जरिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, राशन कार्ड समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे।

सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी जांच और गुप्त निगरानी शुरू की। जांच के दौरान वैशाली थाना क्षेत्र के भगवानपुर रत्ती चौक स्थित “रंजीत डिजिटल स्टूडियो एवं CSC सेंटर” पर पुलिस की नजर गई, जहां संदिग्ध गतिविधियां लगातार चल रही थीं।

इसके बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। छापेमारी के दौरान संचालक राजीव रंजन कुमार को लैपटॉप पर काम करते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने जब कंप्यूटर और अन्य उपकरणों की जांच की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। सिस्टम में फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जुड़े कई डिजिटल रिकॉर्ड और फाइलें मिलीं। वहीं मौके से बड़ी संख्या में तैयार आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, बैंक पासबुक और अन्य सरकारी दस्तावेज भी बरामद किए गए।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अगस्त 2024 से इस अवैध धंधे में सक्रिय था। वह लोगों से ₹200 से ₹500 तक लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उपलब्ध कराता था। पुलिस को आशंका है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंकिंग फ्रॉड, सिम कार्ड लेने, सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभ उठाने और अन्य साइबर अपराधों में भी किया गया हो सकता है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, स्कैनर, प्रिंटर, फिंगरप्रिंट डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं और इसका दायरा किन-किन जिलों तक फैला हुआ है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। आम लोगों से भी अपील की गई है कि किसी भी सरकारी दस्तावेज को बनवाने के लिए केवल अधिकृत केंद्रों का ही उपयोग करें और किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यहां संदिग्ध तरीके से काम चल रहा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इतनी बड़ी फर्जीवाड़े की फैक्ट्री चल रही है।







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